Monday, 8 August 2011

Gangapurcity - Patrika connect against corruption

आम आदमी को करनी होगी पहल

-भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने दी बेबाक राय
-मैग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान
पत्रिका संवाददाता @ गंगापुर सिटी.

मीडिया एक्शन गु्रप (मैग) के पत्रिका कनेक्ट कार्यक्रम के तहत भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की रविवार को वार्ड ३४ से शुरूआत की। इस दौरान लोगों ने भ्रष्टाचार की पीड़ा को बेबाकी से व्यक्त किया। लोगों का मानना था कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए आम आदमी को पहल करनी होगी। भ्रष्टाचारियों को किसी में भी साथ नहीं देना होगा। कुछ लोगों ने कहा कि अन्य देशों की तरह यहां भी भ्रष्टाचारियों को सख्त सजा देने का प्रावधान होना चाहिए। इसी प्रकार अन्य लोगों ने भी अपने जीवन में सरकारी अधिकारियों से काम कराने के दौरान आई परेशानियों एवं दी गई सुविधा शुल्क के संस्मरण बताए।    
अधिकारियों के आदेश भी नहीं माने
कार्यक्रम के दौरान एडवोकेट सबीना बानो ने कहा कि उन्होंने अपने पिता पर भरण-पोषण का भत्ता देने के लिए वाद दायर किया था। कुछ वर्ष पूर्व (जब उन्होंने वकालात नहीं की थी) तब उनके पिता ने उनके खिलाफ हिण्डौन थाने में मारपीट का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। पुलिस ने मामले की तफ्तीश कर एफआर भी लगा दी, लेकिन इसके बाद पुलिस वाले कुछ जानकारी लेने उनके घर आए व उनकी मां से पांच हजार रुपए मांगे। पुलिस वालों का कहना था हिण्डौन से गंगापुर में आने का खर्चा है। इस पर उन्होंने करौली के पुलिस अधीक्षक को शिकायत की। पुलिस अधीक्षक ने उन्हीं के सामने थानाप्रभारी को फोन कर महिलाओं को इस प्रकार परेशान नहीं करने की हिदायत दी, लेकिन पुलिस वाले बाद में भी उन्हें परेशान करते रहे व धमकाते रहे। उस समय मजबूरन उन्हें पुलिस को तीन हजार रुपए की रिश्वत देनी पड़ी।
...और चोर ही बदल दिए
वैद्य मुख्तिअर खां ने पुलिस महकमे के भ्रष्टाचार की दास्तां सुना सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि वे एक औषधालय में कार्यरत थे तब रात के समय चोर औषधालय से बर्तन व सामान ले गए। इसका उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज करा दिया। बाद में कुछ ग्रामीणों ने उन्हें चोरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पुलिस को भी चोरों के बारे मे बता दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद पुलिस ने एक व्यक्ति को पकड़ चोरी का गुनाह कबूल करवा लिया। पुलिस ने उन्हें बुलाकर चोर के बारे में बताया, लेकिन पुलिस के सामने ही जब उन्होंने चोर से पूछा की औषधालय कहां स्थित है, तो वह  कुछ भी नहीं बता पाया। इतना ही नहीं पुलिस ने चोर से कुछ बर्तन बरामद कर उन्हें सौंपे, लेकिन हकीकत यह थी कि बर्तन नए खरीदे गए थे। उन्हीं के सामने औषधालय का नाम लिखवाया गया था। उन्होंने इसका विरोध किया व उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की। इस पर उनका कहना था कि पुलिस ऐसे ही काम करती है। उन्हें सामान मिल रहा है तो ले लें। 
नहीं मिल पाई छात्रवृत्ति
नारायणलाल महावर ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने बेटे को जयपुर के एक संस्थान से कम्प्यूटर का कोर्स कराया। इसके लिए सरकार की ओर छात्रवृत्ति भी देय थी। संस्थान ने छात्रवृत्ति के लिए समाज कल्याण विभाग को आवेदन भेज दिया, लेकिन छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं हुई। इस पर जब वे विभाग के लिपिक के पास गए तो उन्होंने फाइल पास करने के लिए तीन हजार रुपए मांगे। उन्होंने कहा कि वे गरीब है व केवल १५ सौ रुपए दे सकते हैं। इस पर लिपिक ने पैसे ले लिए। कुछ दिनों बाद जब वे दुबारा कार्यालय में गए तो बताया कि उनकी फाइल ही कहीं गुम हो गई और आज तक उनके बेटे को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई।
भगवान के आले में रखवाई सुविधा शुल्क
अध्यापक शेर मोहम्मद ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने पालिका से मकान का पटï्टा पालिका से बनवाया था, लेकिन यह रजिस्टर्ड होना आवश्यक था। उन्होंने ईओ से पटïï्टा रजिस्टर्ड कराने की मांग की। इस पर ईओ व्यस्त होने की कहकर छह माह तक चक्कर कटवाते रहे। एक दिन ईओ ने उन्हें शाम को घर पर मिलने बुलाया। वह घर पहुंचा तो ईओ ने उनसे सेवा पूजा के नाम रिश्वत मांगी। जब उन्होंने जेब से पैसे निकाल कर दिए तो उन्होंने खुद नहीं लेकर कमरे में ही बने भगवान के आले में पैसे रखने को कह दिया। वे एक हजार रुपए रखकर आ गए। दूसरे दिन सुबह ईओ ने ही आगे से फोन कर तहसील में बुला लिया और थोड़ी देर में ही सारा काम हो गया। इसी प्रकार पार्षद मुमताज खां, तारा गुप्ता, फारूख खां, जफर खां, वहीद खां, आदि ने भी अपने अनुभव मैग कार्यक्रम के दौरान बांटे।

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