Saturday, 30 July 2011

Dungarpur - With 80 new admission target reached at 1514

शतकों पर शतक

- विद्यालयों से जुड़े 80 नए बच्चों के साथ अभियान का आंकड़ा 1514 पहुंचा
- आओं पढ़ाएं, सबको बढ़ाएं अभियान

कार्यालय संवाददाता @ डूंगरपुर
 राजस्थान पत्रिका और मीडिया एक्शन ग्रुप की ओर से चलाए गए ‘आओं पढ़ाएं, सबको बढ़ाएं अभियान’ के तहत हो रहे नामांकन में रोजाना नए रिकार्ड स्थापित हो रहे हैं। शुक्रवार को अलग-अलग विद्यालयों में 80 बच्चों को जोडऩे के साथ ही आंकड़ा 1514 तक पहुंच गया है।

बच्चों को निशुल्क प्रवेश
 सरोदा के हंसवाहिनी प्राथमिक विद्यालय में पांच संस्थाप्रधान राजेश व्यास के सहयोग से पांच बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया गया। इस मौके पर अनिल भट्ट, ईश्वरलाल परमार, मनोज भट्ट एवं अनिता सुथार शामिल हुए।
रामगढ़ के राउप्रावि मसाणा में संस्थाप्रधान अनिल जोशी के निर्देशन में 21 बच्चों को प्रवेश दिया गया।
साबला के राउप्रावि भाडग़ा में संस्थाप्रधान कमलाशंकर चौबीसा, जवाहरलाल मीणा, ईश्वरलाल राठौड़, वालचंद, हरीशचन्द्र मीणा, नारायण मईड़ा के सहयोग से 12 को प्रवेश मिला। राजकीय शिक्षाकर्मी प्रावि क्यावड़ी में मगनलाल मीणा एवं संतोष रोत के सहयोग से 18 नए बच्चों का दाखिला हुआ। राप्रावि वरवासा जागीर में अज्ञेयकुमार चौबीसा ने तीन बच्चों को प्रवेश दिया।
पिण्डावल। राउप्रावि पाटिया में प्रधानाध्यापिका सुशीला जैन के निर्देशन व डायालाल कोठारी, सतीशचंद्र डामोर, प्रमिला रेटवा के सहयोग से 21 बच्चों का दाखिला हुआ।

........................................................................

विभाग का ‘रिवर्स गियर’

- सीटीएस सर्वे में चिन्हित हुए बच्चों के लक्ष्य को कम करने की कवायद
- आयुपार बच्चों के नाम हटवाने में जुटा विभाग

कार्यालय संवाददाता @ डूंगरपुर

गत वर्ष आंख मिच कर हुई चाईल्ड टे्रकिंग सर्वे की गड़बडिय़ों पर अब विभाग ने मुहर लगानी शुरू कर दी है। सर्वे में चिन्हित हुए अधिकांश बच्चों के अपात्र घोषित होने से प्रदेश स्तर पर नामांकन अभियान की उपलब्धि के लिहाज से पिछड़ रहे विभाग ने अब राजस्थान प्रारम्भिक परिषद् को संशोधित लक्ष्य भेजने की कवायद शुरू कर दी है।

पत्रिका ने उठाया था मामला

गत वर्ष हुए चाईल्ड टे्रकिंग सर्वे में 26 हजार 236 बच्चों को शिक्षा से दूर चिन्हित किया गया था। लेकिन, सर्वे के तहत नामांकन अभियान में मिले लक्ष्य अनुरूप पड़ताल की, तो अधिकांश बच्चे आयु पार, विवाहित, पूर्व से ही स्कूलों से जुड़े होना पाया गया। राजस्थान पत्रिका ने सीटीएस सर्वे की गड़बडिय़ों को लेकर 15 जुलाई 2011 के अंक में  ‘सर्वे की खुली हकीकत’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर उदाहरण कई विद्यालयों की स्थिति का खुलासा किया था।

अधिक फिर भी कम

विभाग ने अब तक करीब आठ हजार से अधिक बच्चों को विद्यालयों से जोड़ दिया है। लेकिन, सीटीएस सर्वे के मुताबिक लक्ष्य काफी अधिक होने से उपलब्धि प्रतिशत काफी कम आ रहा है। जबकि, पात्रों का प्रतिशत ही गिना जाए, तो विभाग की उपलब्धि 60 फीसदी से भी ऊपर पहुंच जाती है। अपात्र विद्यार्थियों के चयन के लिए विभाग ने विशेष प्रपत्र भी तैयार किए हैं।

भेजे है लक्ष्य
. संशोधित लक्ष्य के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग ने बड़ी संख्या में पात्र बच्चों को जोड़ लिया है। पर, अपात्रों के नाम जुड़े होने से समस्या आ रही है।
- केएल जोशी, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी

No comments:

Post a comment