Monday, 25 July 2011

Dungarpur - Private schools to renew regiatration, admission figure reached at 1195


निजी विद्यालयों की मान्यता पर कटार

- प्रदेश भर के निजी प्राथमिक विद्यालयों की मान्यता निरस्त
- दुबारा लेनी होगी

कार्यालय संवाददाता @ डूंगरपुर
निजी विद्यालयों के संचालकों और उनमें अध्ययनरत बच्चों के अभिभावकों के लिए यह खबर चौकाने वाली हो सकती है। प्रदेश भर के निजी प्राथमिक विद्यालयों की मान्यता पर कटार लटक गई है। सरकार ने शिक्षा का कानून अधिकार के तहत हजारों निजी प्राथमिक विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी है। अब उन्हें मान्यता संबंधित कार्रवाई के लिए एक बार फिर चप्पलें घसीटनी होगी।

यह है फरमान
राजस्थान प्रारभिक शिक्षा निदेशक की ओर से हाल ही प्रदेश भर के जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। इसमें निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राजस्थान निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2011 का हवाला देते हुए बताया है कि पूर्व में गैर सरकारी प्राथमिक विद्यालयों का संचालन मान्यता से मुक्त था। लेकिन, उक्त अधिनियम के लागू होने के बाद इन विद्यालयों को मान्यता लेना जरुरी है।

फेक्ट-फाइल
1995 के पूर्व शिक्षा विभाग निजी विद्यालय खोलने के लिए मान्यता देता था। लेकिन, इसके बाद सरकार ने एक आदेश जारी कर मान्यता नियमों में परिवर्तन किया। इसके अनुसार मान्यता नहीं लेने पर भी विद्यालयों का संचालन किया जा सकता था। पर, इस नियम के लागू होने से निजी विद्यालयों पर विभाग की नकेल कमजोर पड़ रही थी। इस पर निदेशालय ने एक संशोधित आदेश जारी किया। इसमें निजी विद्यालय खोलने पर विभाग की ओर से केवल ‘स्वीकृति’ लेना तय किया। नवीन आदेशों के तहत अब 1995 के बाद खुले समस्त प्राथमिक विद्यालयों को मान्यता लेना जरुरी किया है।

जेब भी होगी ढीली
निजी विद्यालयों के संचालकों को मान्यता के लिए 31 जुलाई के पूर्व 50 हजार रुपए संस्था के नाम की सावधि जमा (एफडी), दस हजार रुपए (उपयोजना क्षेत्र के जिलों के लिए पांच हजार रुपए ) का ड्राट बालिका शिक्षा फाउण्डेशन तथा एक हजार रुपए का ड्राट जिला शिक्षा अधिकारी प्रारभिक कार्यालय के नाम से देना होगा। साथ ही निर्धारित प्रारूप में समस्त कागजात देने होंगे। तय तिथि तक उपरोक्त प्रावधानों को पूर्ण नहीं ेकरने वाले विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी जाएगी।

प्रपत्र उपलब्ध...
. मान्यता प्रपत्र बीईईओ एवं डीईओ कार्यालय में उपलब्ध है। संचालक  तय तिथि में आवेदन प्रस्तुत करें।
- केएल जोशी, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी


एक और अर्धशतक

- विद्यालयों से जुड़े 55 और बच्चे
- आंकड़ा 1195 पहुंचा

- आओं पढ़ाएं, सबको बढ़ाएं अभियान

कार्यालय संवाददाता @ डूंगरपुर
राजस्थान पत्रिका और मीडिया एक्शन ग्रुप की ओर से बच्चों को विद्यालयों से जोडऩे के लिए शुरू किए गए ‘आओं पढ़ाएं, सबको बढ़ाएं’ अभियान ने एक और अद्र्धशतक लगा दिया है। अभियान के तहत शनिवार को निजी एवं राजकीय विद्यालयों में 55 बच्चों को जोड़ते हुए आंकड़ा एक हजार 195 तक पहुंच गया है।

यहां इतने बच्चे
एकलव्य पब्लिक उच्च प्राथमिक विद्यालय खेड़ा कच्छवासा में संस्थाप्रधान जितेन्द्र चौबीसा एवं शिक्षक हितेश, करणवीरसिंह, करणसिंह राठौड़ एवं योगेश के सहयोग से आरटीई के तहत 15 बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया गया।
साबला के राउप्रावि रंगेली में संस्थाप्रधान खेमराज मीणा, शिक्षक सुरेश शर्मा, हरिसिंह राजावत तथा वासुदेव मीणा के सहयोग से 16 बच्चों को प्रवेश दिलाया।
पिण्डावल के राप्रावि माल टेम्बरपाड़ा में प्रधानाध्यापक किशोरसिंह चौहान के निर्देशन व गिरजाशंकर मेहता व अशोक पण्ड्या के सहयोग से आठ विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाया। इस मौके पर सरपंच लालजी मीणा, ईश्वरसिंह पंवार, दर्जनसिंह चौहान शामिल हुए। रामावि माल में संस्था प्रधान गिरीश भट्ट के सान्निध्य में सात ड्रॉप आउट विद्यार्थियों ने वापस प्रवेश लिया। राप्रावि भाटोली के डूंगरीफला में प्रधानाध्यापक कांतिलाल यादव व प्रवीण रावल के सहयोग नौ बच्चों का प्रवेश हुआ। इस मौके पर नानचंद, लालजी, देवा, अशोक खराड़ी, गौतम, सजन एवं नर्वदा शामिल हुए।

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